Ek Prem Kahani Meri Bhi ...: (Hindi Edition) by Singh Ravinder

Ek Prem Kahani Meri Bhi ...: (Hindi Edition) by Singh Ravinder

Author:Singh, Ravinder [Singh, Ravinder]
Language: hin
Format: azw3
ISBN: 9789351185895
Publisher: Penguin Books Ltd
Published: 2011-12-21T18:30:00+00:00


उससे दूर

पहला दिन

मुझे अच्छी तरह याद है । वह शनिवार की रात थी । क़रीब 7.30, जब मैं होटल पहुँचा । रिसेप्शन पर पेमेंट करते हुए मैंने इस बात को पक्का किया कि मेरे रूम में इंटरनेट कनेक्शन हो ।

बेलब्वॉय ने मुझे फर्स्ट फ्लोर कमरे तक पहुँचने में मदद की । मैंने उसे क़रीब तक डॉलर दिया । फिर मैं अपने कमरे में घुसा । सामान दरवाज़े पर ही छोड़ते हुए, मैंने जल्दी से अपना लैपटॉप बैग खोला और उसी समय ऑनलाइन हो गया । मैंने सबसे पहले याहू मैसेंजर खोला । सबसे पहला काम मैंने यही किया ।

इंडिया में सुबह का वक्त था और मैं जानता था कि वह मेरा इंतज़ार कर रही होगी ।

और वह सचमुच कर रही थी ।

हमने पहले से ही तय कर लिया था कि हम लोग इसी समय चैट किया करेंगे । हालाँकि, मैं छोटे सफ़र की उम्मीद कर रहा था, और उस लिहाज़ से मैं कुछ लेट था । और दिल्ली से हीथ्रो की 8 घंटे की यात्र के बाद, 3 घंटे ट्रांजिट में, फिर 8 घंटे हीथ्रो से न्यूयॉर्क और फिर टैक्सी से दो घंटे में न्यूयॉर्क से शेल्टन, मुझे बुरी तरह जेटलैग हो रहा था ।

लेकिन 24 घंटे से उससे बात नहीं की थी इसने सभी चीज़ों को पीछे छोड़ दिया ।

वह मुझे ऑनलाइन देखकर खुश हो गई । मैं भी था । लेकिन उसकी ख़ुशी ज़्यादा थी क्योंकि उसने पल भर में इतनी लाइनें लिख मारीं:

हे...शोना...तुम हो

तुम कैसे हो...कब पहुँचे ।

सफर कैसा रहा? अभी तुम कहाँ हो?

तुम हो न?

बज़ ।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया, उससे सिर्फ पूछा, क्या तुमने मुझे मिस किया?

‘बहुत ज्यादा डियर...और तुम...?’

‘हुम्म...मैं तुम्हें बताऊँगी लेकिन पहले अपना स्पीकर ऑन करो और बातचीत शुरू करो ।’

मैंने उसे अपने सफ़र के बारे में सब कुछ बताया–फ्लाइट्स, ट्रांजिट, साथ सफ़र करने वालों के बारे में और इस सबके बीच मैंने उसकी कमी कितनी महसूस की । उसने मुझे बताया कि उसने कैसे अपना सारा दिन मुझसे बिना बात करते बिताया । यहाँ तक कि उसके घर में भी सब समझ गए थे कि वह मुझे कितना मिस कर रही थी । एक दिन के बाद एक-दूसरे की आवाज़ सुनना बहुत अच्छा लग रहा था । पिछले छह महीने में यह कभी नहीं हुआ था । हम काफी देर तक बातें करते रहे और आख़िरकार जब फरीदाबाद में बिजली चली गई और उसके यूपीएस ने भी काम करना बंद कर दिया तब जाकर हमने एक-दूसरे को गुड बाय कहा ।

तब मुझे समझ में आया कि मुझे अपने जूते उतार लेने चाहिए (जिसे मैं पिछले दिन से ही पहने हुए था), अपना सामान ले आना चाहिए, जो अब भी गैलरी में ही था । उससे बात करने की जल्दी में मैं अपना वॉलेट रिशेप्सन पर ही भूल आया था ।



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